समास (Samas) — संपूर्ण गाइड
दो या अधिक शब्दों का संक्षिप्तीकरण | Smart Tricks, उपभेद & परीक्षा में पूछे गए ट्रैप्स
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समास की परिभाषा : दो शब्दों को मिलाकर एक नया, सार्थक एवं छोटा शब्द बनाना समास कहलाता है।
पहले पद को पूर्वपद एवं दूसरे को उत्तरपद कहते हैं। विग्रह करने पर मूल वाक्य प्राप्त होता है।
समास के छह प्रकार
पहला पद अव्यय / उपसर्ग
पूर्वपद प्रधान, समस्त पद अव्यय की तरह कार्य करता है।
★ दोहराव (रातोंरात, घर-घर) भी अव्ययीभाव
दोनों पद प्रधान
विग्रह में 'और', 'या', 'अथवा' छिपा होता है।
- इतरेतर – माता-पिता (माता और पिता)
- समाहार – दाल-रोटी, हाथ-पाँव
- वैकल्पिक – पाप-पुण्य (पाप या पुण्य)
संख्यावाचक + समूह
"नंबर देखो, द्विगु मारो!" — जहाँ गिनती हो, वहाँ द्विगु।
विशेषण + विशेष्य / उपमान
विग्रह में "है जो" या "के समान" आता है।
कोई पद प्रधान नहीं, तीसरे की ओर इशारा
"VIP समास" – देवी-देवता, उपाधियाँ, राक्षस।
उत्तरपद प्रधान, कारक चिह्न प्रकट
🔥 3 उपभेद : नञ् (असभ्य), उपपद (जलद), लुप्तपद (दहीबड़ा)
परीक्षा में बार-बार फंसाने वाले ट्रैप्स
'नीलकंठ' – यदि विग्रह "नीला है जो कंठ" → कर्मधारय, यदि "नीला कंठ जिसका (शिव)" → बहुव्रीहि। देवता के लिए बहुव्रीहि प्राथमिकता
'चतुर्भुज' – समूह अर्थ → द्विगु, विष्णु अर्थ → बहुव्रीहि।
'रातोंरात', 'हाथोंहाथ' – योजक चिह्न देखकर द्वन्द्व न समझें, ये अव्ययीभाव हैं।
'दहीबड़ा' (दही में डूबा हुआ), 'ऊँटगाड़ी' (ऊँट से चलने वाली) – कारक सहित पद लुप्त।
एक नज़र में समास की पहचान
| समास | पहचान ट्रिक | उदाहरण |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | उपसर्ग / दोहराव | यथाशक्ति, रातोंरात |
| द्वन्द्व | 'और' / 'या' का संबंध | माता-पिता, पाप-पुण्य |
| द्विगु | संख्या + समूह | पंचवटी, चौराहा |
| कर्मधारय | 'है जो' / 'के समान' | कालीमिर्च, मुखचन्द्र |
| बहुव्रीहि | तीसरे का बोध (VIP) | नीलकंठ, दशानन |
| तत्पुरुष | कारक चिह्न (को, से, का, में..) | गंगाजल, राजपुत्र |